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चलती हैं आंधियां तो आशियाने उजड़ जाते हैं-चमन के खिलखिलाते हुए फूल उखड़ जाते हैं
चलती हैं आंधियां तो आशियाने उजड़ जाते हैं चमन के खिलखिलाते हुए फूल उखड़ जाते हैं । अब तो सियासत भी आंधियों से कम नहीं लगती आ जाए मुआशर�
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न मोटर गाड़ियों का शोर था न मोबाइलों का दौर था-वो वक़्त ही कुछ और था
न मोटर गाडियों का शोर था न मोबाइलों का दौर था कुछ बात थी उस वक़्त में वो वक़्त ही कुछ और था। न तो नफरत की बोली थी न देहशतगर्दो की टोली थी ईम
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अभी दरिया है- सेलाबे समुंदर तो होने दो
अभी दरिया है सैलाबे समुन्दर तो होने दो फलक के साये मे सो रहे है बो उन्हे सोने दो । ये खाके वतन की औलादे हैं इनकी आवाज नही दबती तख्ता प�
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बड़ी ही नज़ाकत से बात करती है
यही काम है उसका जो ये दिन रात करती है प्यार मोहब्बत बड़ी ही नज़ाकत से बात करती है। डरती है शायद के कोई देख न ले उसको इसलिए छुप छुप के म
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कितने मधुर थे समय के पंछी-जिनकी अब आवाज नहीं है
कितने मधुर थे समय के पंछी जिनकी अब आवाज नहीं है बिखर गये है सारे सुर अब तानों में साज नहीं है| कुछ खोया है कुछ पाया है कुछ अपने अब साथ न�
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कच्चे मकानों- ईमान बहुत पक्के थे
बात है 90 के दशक की कुछ बाते कुछ यादें जो आपके सामने लिखने जा रहा हूँ जो सच्ची भी हैं और अच्छी भी हैं|........................
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हुआ हूं जब से मुतासिर तुम्हारी बातों से
हुआ हूं जब से मुतासिर तुम्हारी बातों से में सोया ही नही हूं कई रातों से उठे नजर जो तुम्हारी तो काम हो जाए हुआ है ऐसा करम चंद मुलाकातों �
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किसी के साथ चलने से- सफर पूरा नहीं होता
किसी के साथ चलने से सफर पूरा नहीं होता रास्ते जरूरी हैं मंजिल तक पहुंचने के लिए
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कर के रोशन जमाने को
कर के रोशन जमाने को में हर हिस्से में ढल जाता हूं में तो चिराग हूं साहब शाम होते ही जल जाता हूं।
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उनकी नजर से नजर मिलाने की कोई बात तो होती
उनकी नजर से नजर मिलाने की कोई बात तो होती चंद लम्हों के लिए ही सही लेकिन मुलाकात तो होती। नक्श कर लेता में अपनी आंखों में उनके रुख ए अ�
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