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SHAHWAJ KHAN

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My Articles

वो कत्थई आंखों वाली कौन है। सुना है बड़ा ही सुरूर रखती है और लहजे में वो अपने नज़ाकत का शऊर रखती है। मान बैठी है बो खुद को हुस्न - ए- सीर� read more >>
माँ की दुआएं साथ होती है तो हर मुसीबत टल जाती हैं और माँ ममता की बो काया है जो हर सूरत में ढल जाती है। माँ दुआ भी read more >>
खवाब मुझे अंजाम बता देता है मर्तबे इश्क़ मे मेरा नाम बता देता है। और रहता हूं जब भी खोया हुआ उसके तसब्वुर में रातों की तन्हाई को अहकाम ब read more >>
वक़्त और हालात इन्शान को मजबूर बना देते है वर्ना नेकियों की किताब यूं खाली न होती । और तादाते इश्क़ खुदा की इन्तेहा मत पूंछो वर्ना वलि� read more >>
न हुस्न देखता हूँ न जमाल देखता हूँ | तुम्हारी नर्गिशी आँखों में कमाल देखता हूँ| झुकी हुई नज़रों को उठाना फिर उठाकर झुकाना मा� read more >>
गौर करना मेरे अल्फ़ाज़ों की रोशनी में उसको अपनी सुखनवरी का साहब तालिब हो गया है वो। और अंदाजे गुफ्तगू की हकीकत न पूँछिये लगता है दौरे व read more >>
न उरूज की बात है न जवाल की बात है जिस हाल में है तू उस हाल की बात है। न ज़िन्दगी है तेरी न मौत का पता है रहमों करम है उसका जो होता तुझे आता � read more >>
काँटों से भरी इस वादी में फूलों का बता दे पता मुझे ए हिन्द की धरती कहाँ है तू। इंसान कहाँ है बता मुझे। कोई हिन्दू कोई मुस्लि read more >>
धोके सितमगरों की नई चाल चल गए खुद अपनी आग में यहां इन्सान जल गए। खुदगर्जियाँ जहां में नये गुल खिला गईं मजहब के रास्ते में उजाले फिसल � read more >>
कहते कहते अपनी बात को रह गया कोई अल्फाजों की तिश्नगी में बह गया कोई। अंदाजे गुफ्तगू का ये कैसा मंज़र है लव खामोश थे मगर नजरों से कह गया read more >>
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