संदीप कुमार सिंह 02 Jun 2026 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत मेरी यह ग़ज़ल पढ़कर आप लोग प्यार की शक्ति से भली भांति परिचित हों जाएंगे. अतः आप लोगों से नम्र आग्रह है कि एक बार जरूर पधारें और मेरी इस ग़ज़ल से जिन्दगी में खुशियों के रंग भरें .आप सभी का हार्दिक स्वागत है. 1093 0 Hindi :: हिंदी
ग़ज़ल बुजदिल जो इंसान है वो, जिंदा भी बेज़ान है वो। भूखे को जो न दे रोटी, दरिद्र ही यजमान है वो। जो भी तुझ पर गुजरी है, मौला का फरमान है वो। दुर्बल का जो रक्षक है, सही मायने में इंसान है वो। जिसको चुका सकता ही नहीं, मुझपे तेरा एहसान है वो। ये जो मेरी जिन्दगी है, नज़ीर का अभिमान है वो। संदीप जीता जागता प्रमाण है, सारे चमन की शान है वो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....