Anilkumar Rathwa (Sameer) 28 Feb 2026 ग़ज़ल दुःखद खुद से वफ़ा की तलाश 8371 0 Hindi :: हिंदी
सबको खुश रखने की कोशिश में खुद को भुला बैठा मैं, औरों के घर रोशन किए, अपना ही घर जला बैठा मैं। सबकी सुनता रहा मैं 'हाँ' में 'हाँ' मिलाकर ताउम्र, अपनों की भीड़ में खुद को तन्हा पा बैठा मैं। जिनके आँसू पोंछने में कटी मेरी सारी जवानी, आज उन्हीं की महफिल में खुद को पराया पा बैठा मैं। तराशा था जिन्हें मैंने बड़ी चाहत और फुर्सत से, उन्हीं के हाथों में आज अपनी तबाही का नज़ारा पा बैठा मैं। बहुत जी लिया अब तलक दूसरों की मर्जी के साये में, अपनी ही हस्ती को अब तो खाक में मिला बैठा मैं।