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वो सरहद का सिपाही

Danendra 29 Jun 2025 कविताएँ देश-प्रेम सिपाही की अमर बलिदान 20733 1 5 Hindi :: हिंदी

वो न झुकता है, न रुकता है, न डर की भाषा जानता है,
सीना ताने, मौत से आंख मिलाकर चलता जाता है।
जिसे धूप, बर्फ़, तूफ़ान नहीं कोई भी रोक सके,
वो फौजी है, जो मातृभूमि के लिए जीता-मरता है।

गूंज उठती है धरती जब उसकी टक्कर होती है,
दुश्मन की तोपें कांप उठें जब उसकी नज़रें रोती हैं।
शब्द नहीं, वो शौर्य की भाषा में उत्तर देता है,
गोली का जवाब बुलेट से, छांव का जवाब कफ़न से देता है।

हर रात वो नींद गिरवी रखकर पहरा देता है,
ताकि हम चैन से सांस लें, वो जागता रहता है।
वो अपने घर से दूर, सरहद को घर बना लेता है,
अपनी माँ से पहले “भारत माँ” को प्रणाम करता है।

जिस हाथ में किताब थी कभी, अब बंदूक थामे खड़ा है,
तिरंगे के रंग में रंगा हुआ, वीरता में खुदा है।
मिट्टी की सौगंध खाकर जो रणभूमि में उतरा है,
वो हर फौजी नहीं, भारत की आत्मा का चेहरा है।

बात सिर्फ़ वर्दी की नहीं, ये सम्मान की बात है,
हर शहीद की चिता से उठती स्वाभिमान की बात है।
वो जिए तो जय भारत, मरे तो अमर नाम करे,
ऐसा ही फौजी हर देश के इतिहास में काम करे।

Comments & Reviews

vikash kashyap
vikash kashyap जय हिंद महोदय

11 months ago

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