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ठाठीयो

Radheshyam Joshi 26 Jan 2026 कविताएँ समाजिक 4723 0 Hindi :: हिंदी

म्हारै मां बणावती ठाठीयो,
छोटो, बड़ो अर भौत बड़ो।
घर रौ सामान संभाळतो,
ब्याव-शादी में मिठाई भी।

भांत-भांत रा मांडणा अर,
हिरमिच सूं रंगेड़ा ठाठीया।
मां फगत ओ बर्तण ही नीं,
घर रौ ठाठीयो भी बणायौ।

घर वाळा भी भेळा रैवता,
जियां मिठाई, रोटी रैवती।

'ठाठीयै' माटी अर कागद सूं जलम लियो।
घरां में स्नेह अर भैळपणै रो रूप बणग्यो।

- राधेश्याम जोशी कोहिणा

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