प्रवीण कुमार 10 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 21485 0 Hindi :: हिंदी
सच अहम जरुरी है। इन्सान का मन-मनका , होना भी अहम जरुरी है। दोस्तों में दोस्त होना , अपने में सौ होना(आत्मनिर्भर), मेरे दोस्त! अहम जरुरी होना है। सच अहम जरुरी है। एकता और तुम्हारी एकता। कहना इतना ही है - करनी व कथनी में एकता। इन्सान की अहम जरुरी है। रिश्ते; बनते -बनाते, बिगड़ते भी है। इस सच को मानना , सच- हक़ीक़त से दूर कहीं। रिश्तों में सच अहम जरुरी है। सच अहम जरुरी है। लोगों का तुम में देखना -दिखना। ज़माने में तुम्हारा एहसान। भाई मेरे! सच में अहम जरुरी है। सच अहम जरुरी है।