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मां आखर सूं मुंह भर ज्यावै

Radheshyam Joshi 02 Feb 2026 कविताएँ समाजिक 7935 0 Other :: Other

मां आखर सूं मुंह भर ज्यावै,
मां नै देख्यां मन हरसावै।
मां रौ करज उतर ना पावै,
फरज आपणो बढतो जावै।
मां धरणी अर मां ही जरणी,
पग-पग माथै दुख नै हरणी।
मां री पूजा धरम आपणो,
मां री सेवा करम आपणो।

- राधेश्याम जोशी कोहिणा

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