प्रवीण कुमार 31 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 11865 0 Hindi :: हिंदी
कोशिश और हम्हारी तारीफ़ साथ नहीं मिल सकेंगे। हमें आगे आना है तो कोशिश हमें करनी है। लेकिन खुद से की, न की तारीफ़ हमें कोई मायने नहीं देंगी। उसने पुकारा भी तो नहीं। हम जो तारीफ़ करते। कोशिश और हम्हारी तारीफ़ साथ नहीं मिल सकेंगे। जिसे पाना होता है, वो पाकर ही रहता है। एक तारीफ़ ही है। जिसे मांग पाना नहीं बल्कि खुद से देना होता है। न हम खफा रहे उम्मीद से। न हम से हालात ही। कोशिश और हम्हारी तारीफ़ साथ नहीं मिल सकेंगे। यहां आप हैं तारीफ़ के काबिल, वहां पर कोई दूसरे मिलेंगे। कोशिश और हम्हारी तारीफ़ साथ नहीं मिल सकेंगे।