प्रवीण कुमार 09 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 5615 0 Hindi :: हिंदी
हर दिल से,
खुदा मांगता हूं।
चिरागों से
अपनों के पाने की,
दुआ मांगता हूं।
हर दिल से,
खुदा मांगता हूं।
करने की जिसने ख्वाहिश थी,
मेरे घर के आंचल को
रोशन -ए ख्वाब।।
ज़माने के गुरूर से,
कुदरत के नूर से,
उस लम्हें को मांगता हूं।