प्रवीण कुमार 23 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 16730 0 Hindi :: हिंदी
आज के प्राणी की जरूरतें भी बड़ी। तमन्नाओं का संसार ही बड़ा, लेकिन सकुन एक पल भी नहीं। लाख से करौडपति ही बना, लेकिन कमजोरी भी वही; कि दौड़ कहीं जाकर थमी भी नहीं। आज के प्राणी की जरूरतें भी बड़ी। अगर आज रुक भी जाए । कल फिर भी दौड़ जारी रहेगी। कोई रुकना भी नहीं चाहेगा । क्योंकि उसकी कोशिश ही रहेंगी, परिवार की नींव हर तरह मजबूत करने की। आज के प्राणी की जरूरतें भी बड़ी। इन्सान देखने -समझने का नजरिया, बदलें भी लेकिन प्रयास तो नहीं। हां, कमजोरी इतनी ही होगी। वो सबके साथ -2, पर, उसके कोई साथ भी नहीं। आज के प्राणी की जरूरतें भी बड़ी।