संदीप कुमार सिंह 14 Jun 2023 आलेख देश-प्रेम सामाजिक आंदोलन, वास्तव, राजनीति, व्यवस्था, व्यापक, अवधारणा, जीवन, आर्थिक, संगठन, स्वार्थ 32311 0 Hindi :: हिंदी
वास्तव में सामाजिक आंदोलन एक व्यापक अवधारणा है। जो सामाजिक जीवन की विभिन्न पक्षों को प्रभावित करती है। आंदोलन का लक्ष्य समस्त सामाजिक व्यवस्था को प्रवर्तित कर के एक नवीन ढांचे का निर्माण करना भी हो सकता है या इसका उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था में थोड़ा_बहुत परिवर्तन भी हो सकता है। अब सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे की आर्थिक जीवन, राजनीतिक जीवन, धार्मिक जीवन, सांस्कृतिक जीवन आदि हैं। तो सवाल यहां यह उठता है कि आंदोलन की आवश्यकता क्यों पड़ती है। जब कहीं न कहीं मानवीय मूल्यों को नजरंदाज कर दिया जाता है और सिर्फ और सिर्फ निजी स्वार्थ को शासन या कोई भी संगठन देखता है तो ऐसे में बुद्धिजीवियों को यह बात खलने लगती है। और अन्त में इन बुद्धिजीवियों द्वारा आंदोलन का रूप रेखा तैयार किया जाता है। तो निष्कर्षतः का सकते हैं की सामाजिक व्यवस्था में जब कभी निजी स्वार्थ काम करने लगता है तो आंदोलन की आवश्यकता होती है। अतः व्यवस्था को निर्मल बनाने के उद्देश्य से सामाजिक आंदोलन किए जाते हैं। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....