Poonam Mishra 17 Jun 2023 ग़ज़ल समाजिक क्या लिखूं मन मौन है 52716 0 Hindi :: हिंदी
क्या लिखूं !मन मौन है !पर लिखने को भी मन बेचैन है! उलझन है मेरी उसको मैं ! ना सुलझा सकी ! राह के एक पत्थर को भी मैं ना हिला सकी दर्द से कराहता है! मन मेरा ! इस दर्द को मैं ना कम कर सकी किस तरह जिंदगी में दूर तुमसे हम हुए !पास आने की वजह ना पास है ! इस तरह से जिंदगी गुजरी मेरी! ख्वाहिशें आंसुओं संग बह गई! क्या लिखूं मन मौन है!