Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

बूढ़ी यादें

Santosh kumar koli ' अकेला' 25 May 2024 कहानियाँ समाजिक बूढ़ी यादें 30376 0 Hindi :: हिंदी

मैं मेरे पुरखों के मकान में निवास करता हूं।  न चाहते हुए भी वृद्धावस्था की सीढ़ियां चढ़ रहा हूं। सुबह -शाम बारीनुमा मंदिर में पूजा -अर्चना करना मेरा नित्य कर्म है। सुबह-सुबह चिड़ियों का झुंड आंगन में मौज मस्ती करने लग जाता है, चिड़ियाँ कभी मेरे हाथों पर, कभी सिर पर बैठ पंख फड़फड़ाकर संतुलन बनाने का असफल प्रयास करती हैं। लगता है उनका पेट दाने से ज्यादा मेरे साथ खेलने से भरता है। मेरे साथ में चिड़ियाँ इतनी रच बस गई हैं कि एक बार मेरे बीमार होने के कारण मेरे साथी द्वारा दाना डालने पर एक दाना तक ग्रहण नहीं करती हैं और उदास व खा़मोश बैठी रहती हैं। ऐसा लगता है मानों वे नहीं दाना उनको खाने को दौड़ रहा हो। वह चितकबरी गाय जो रंभाकर अपने आगमन की सूचना देती है। जब तक मैं रोटी नहीं दे देता तब तक वह मेरा ध्यान आकर्षित करने के लिए अलग-अलग नायाब तरीके अपनाती है, मेरे हाथ में रोटी देख वह टुकुर- टुकुर देखती है और पूंछ अपनी पीठ पर डुलाती है। 
वह झबरा कुत्ता जो अपना ज्यादा समय मेरे पैरों में लोटकर ही बिताता है। सवेरे- सवेरे पड़ोस से आती रई की आवाज़, डूंगरी से आती आरती व घंटे की मधुर ध्वनि, ये सब मेरी रूह को शांति का वास्तविक आभास कराती हैं। 
 समय ने करवट ली बेटा विदेश में पढ़कर वहीं बड़ी नौकरी करने लगा तथा गोरी मेम से शादी भी कर ली। एक दिन वह आया और मुझे अमेरिका ले जाने की ज़िद करने लगा। मैंने नहीं जाने के कई तर्क दिए पर जवान ज़िद के आगे जरा ज़िद जवाब दे गई। 
मेरा सारा सामान एक थैले में सिमट गया, बेटा सामान को टैक्सी में रखवाते हुए, "पापा, देखना कुछ रह तो नहीं गया।"मैं उसको कैसे समझाता कि जिस घराड़ी में पुरखों की यादों के साथ मेरी यादें खेला करती हैं, जिस आंगन के आंचल की पवित्र मिट्टी में मैं गिरकर, उठकर चलना सीखा, जिस घर के रज कण के समां में मेरी सांसें समाई हुई हैं, वे सब यहीं तो छूट गए। मेरी बूढ़ी आंखों से बूढ़े आंसू ढलक गए। मैंने संभलकर बेटे से कहा, "कुछ नहीं रहा है" और मैं नीरव स्तब्ध भाव से घर की ओर देखता रहा, टैक्सी रवाना हो गई मैं यादों के गोखे में गुम हो गया।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर � read more >>
सच्चे भाई सुबह की योगा क्लास लेने के बाद मैं पार्क से होते हुए बाजार वाली रोड पर सैर के लिए निकल पड़ी । सुबह के व� read more >>
लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझस read more >>
Join Us: