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मेरी आँख वहाँ रोती है

अशोक दीप 30 Mar 2023 गीत समाजिक Samajik kavita, sad poetry 38139 0 Hindi :: हिंदी

मेरी  आँख  वहाँ  रोती  है ।

विस्थापित-सा जीवन जीकर
  कर्कश बोलों का विष पीकर
    अपने  ही  जर्जर  कंधों  पर
      ममता  लाश  जहाँ  ढोती  है ।

मेरी आँख वहाँ रोती है ।

आग पेट की  शम करने को
  आँतें  सूखी  नम  करने  को
    दुख का पर्वत रख छाती पर
      तरुणी  लाज  जहाँ खोती है ।

मेरी  आँख  वहाँ  रोती  है ।

न्याय धर्म  को  धता बताकर
  रिश्वत को निज अंग लगाकर
    जिस्म  चाटने  वाले  मुँह  से
      लॉ  की  बात  जहाँ  होती है ।

मेरी  आँख   वहाँ  रोती  है ।
           ०००
अशोक दीप
जयपुर

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