संदीप कुमार सिंह 14 Jun 2023 गीत समाजिक झुलस, रहा, है, आदमी, वादा, झटपट, बाज, प्रतिघात, महंगाई, अरमान 25991 0 Hindi :: हिंदी
झुलस रहा है आदमी, छलियों का है राज। वादा झटपट तोड़ते, समझे खुद को बाज।। झुलस रहा है आदमी,मिलता है प्रतिघात। मन जाता है टूट तब,करते सभ्य बलात।। झुलस रहा है आदमी,महँगाई की आग। जला दिया अरमान को,भूल गई अनुराग।। झुलस रहा है आदमी,मिले न अब विश्वास। मिले फरेबी जन यहां,कुचले सबकी आस।। झुलस रहा है आदमी,करे खुशी सरकार। लोगों में है वेदना,मिला नहीं अधिकार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....