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हम है गरीब घर के बेटे(लोकगीत)

Swami Ganganiya 30 Mar 2023 गीत अन्य हम है गरीब घर के बेटे,Hindi shayri,song lyrics lokgeet 110048 2 4 Hindi :: हिंदी

हम हे गरीब घर के बेटे
ना हमारे जैसा दिल का सोकार रह
ख्वाब जो तेरे
सारे पुरे कर दूँ
जग जो मेरा राज रह

>ऐसा कर कोई काम
जो इस जग में तेरा नाम रह
सब जग का तु सेवक बन जा
जिन्दगी भर तेरे सर पे ताज रह

कितने भी दिन जीये मैंने
बनके एक राज रह

>कोई ना हे तेरे जैसा 
इस जग मे सोकार रह

मैं हूँ गरीब घर का बेटा
मेरा तेरे ते इस जग मे नाम रह
हे तु मेरे बाप के जैसा
तेरा भी इस दुनिया मे सम्मान रह

दिल मे जो है कह दे 
ना मन मे कोई पाप रह
हम हे सारे एक ही जैेसे
ना कोई बेदाग रह

बजता ही रह तु अपनी धुन मे
ना तेरे जैसा कोई साज रह
सबके दिल मे अरमा जगा दे
तेरे दिल मे बनके एक आश रह
जो है  तेरा अपना
वो हमेशा तेरे पास रह...

हम है गरीब घर के बेटे
दिल से ना हमारे जैसा कोई सोकार रह
आइए तु मेरा बन क
मेरे दिल मे सदा तेरा इन्तजार रह
दिल के मालिक, दिल मे मेरे बसा (सदा) तेरा प्यार रह
हाथ जोड क करये अरज तु ,ना कोई अंहकार रह

जो तु मँगे वो सब तुझह मिले
ना अधूरा कोई ख्वाब रह
हम है गरीब घर के बेटे
ना कोई हमारे जैसा
दिल कोई सोकार रह...
ना अमीरों जैसी सोहरत अपनी
दो भाईयों मे अपना सम्मान रह...
हम है गरीब घर के बेटे
ना कोई हमारे जैसा 
दिल कोई सोकार रह....
****************
स्वामी गंगानिया

Comments & Reviews

बासुदेव अग्रवाल
बासुदेव अग्रवाल सुंदर लोकगीत

3 years ago

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Praveen kar
Praveen kar आप सब से अनुरोध है की कृपा अपनी रचना जल्द से जल्द देने की कृपाया करे |🙏🙏🙏🙏 कृपया, अपनी मित्र मंडली में मैसेज शेयर कीजिएगा, ताकि लेखन से जुड़े अन्य लोग भी अपनी रचना दे सकें (जो इच्छुक हो)। हैलो! 'हमरूह प्रकाशन' से "वृक्ष हमारे जीवन का आधार" शीर्षक पर एक नई पुस्तक प्रकाशित होने जा रही है, जो नि:शुल्क है। यदि आप वृक्ष, वन, जंगल, पहाड़ और प्रकृति के प्रति लगाव रखते हैं, यदि प्रकृति का होता अंध दोहन आपको परेशान करता है, यदि बढ़ती दावानल (जंगली आग) की लपटें आपको चिंता में डालती हैं, यदि विकास के नाम पर वनमानुष का विस्थापन आपको सोचने पर मज़बूर करता है, तो आप वन, जंगल और वृक्ष आदि के हितार्थ जो भी भाव रखते हैं, उन्हें अपने शब्दों के ज़रिये कविता, लघुकथा, कहानी, ग़ज़ल में लिखकर हमें भेजें। आपकी रचना को हम अपने बुक संकलन "वृक्ष हमारे जीवन का आधार" में संकलित करेंगे। अपनी रचना भेजने के साथ आपको निम्न बातें ध्यान रखनी होंगी- 👉 रचना 16 से 20 पंक्तियों में हिंदी में होनी चाहिए। 👉 रचना स्वरचित, अप्रकाशित और मौलिक हो। 👉लेखक परिचय 4-5 पंक्ति में। 👉अपनी एक फोटो। 👉 रचना प्रकाशित होने पर आपको (Certificate of Appreciation) और प्रमाण पत्र (Certificate of Publication) भी दिए जाएंगे। संकलन के माध्यम से आपकी रचना सामाजिक भूतल पर पहुँचेगी, साहित्य और प्रकृति प्रेमियों तक पहुँचेगी और वन, वृक्ष व जंगल के संरक्षण के प्रति लोगों में एक जागरूकता की चिंगारी फूंक सकेगी। 👉 आपको पुस्तक की सॉफ्ट कॉपी / ई-बुक भी दी जाएगी। Submit/ contact (सब्मिट/संपर्क सूत्र)- 9599802593(वाट्सऐप), 8700731092 (कॉलिंग) संकलक- प्रवीण कुमार आप अपनी रचना भेजने के लिए उपर्युक्त नंबर पर संपर्क करें। नोट: रचना भेजने की समय-सीमा 30 दिन है।

3 years ago

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