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एक यादों का गुलिस्तां

Samar Singh 23 May 2023 गीत दुःखद उनकी संग जो अच्छी याद थी, वो भी खता करने लगी। अब इस हाल में क्या करें? 32721 0 Hindi :: हिंदी

एक यादों का गुलिस्तां था, 
आँधियों के झोंकों से उड़ गया। 
मैं आज भी तनहाई में, बेबसी में हूँ, 
हर दर्द, रुसवाई मुझे ही जकड़ गया।। 

आज भी मैं उस 
खुशबू भरी पवन के पीछे भटकता हूँ। 
यादों के झूलों में, 
फांसी सा लटकता हूँ। 

कभी बरसात होती थी, 
बादलों की गड़गड़ाहट होती , 
आज पतझड़ के पत्तों में भी, 
एक अनायास खड़खड़ाहट होती। 

चलूँ अब दूर कहीं, 
जिंदगी बीत गई। 
मिली शिकस्त, 
तनहाई जीत गई।। 

रोता है रोम- रोम मेरा, 
आशा की हर किरण बुझ गई। 
हर साजिशों में बिखरा पड़ा, 
मेरी जिंदगी उलझ गई। 

बुना था एक सपना, 
वो ताक पे रखे रह गए। 
खतम हो गई जिंदगी,
जहर बिन चखे रह गए। 
 
रचनाकार- समर सिंह "समीर G"

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