संदीप कुमार सिंह 22 May 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिस पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 38290 0 Hindi :: हिंदी
धीरे धीरे हो रहा, अंशुमान अब गर्म। भक्ति भाव में सब रहें,छोड़ें कभी न धर्म।। धीरे धीरे हो रहा,ऋतु में खास सुधार। त्याग रहो आलस्य को, हो अनुपम किरदार।। धीरे धीरे हो रहा,भारत में सब खास। सुख मय रहती सोच जब,होता सब कुछ पास।। धीरे धीरे हो रहा,सबको ही अब हर्ष। नूतन उम्दा काम कर, हो जीवन उत्कर्ष।। धीरे धीरे हो रहा,सब में अब उत्साह। सब कवि जन भी जोश में,करें दूर अब आह।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....