संदीप कुमार सिंह 02 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 25310 0 Hindi :: हिंदी
सुख में देते साथ हैं, दुख में देते छोड़। यह कैसा अति दोष है,जो ला देता मोड़।। सुख में देते साथ हैं, बड़ी बड़ी कर बात। आगे पीछे घूमते,करे याद दिन रात।। सुख में देते साथ हैं,और करे नीत भोग। रौनक मय जीवन लगे,लगे सुखद यह योग।। सुख में देते साथ हैं,बना रहे मृदु मित्र। खुशियों में हम सब रहें, जीवन जैसे इत्र।। सुख में देते साथ हैं,लगते हैं अभिराम। सौरभ सुरभित दोस्ती,अनुपम है गुलफाम।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....