MUSARRAT ALI 15 Dec 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत Khamosh_Alfaz 9380 0 Hindi :: हिंदी
मैं आबिर हूँ है मुझमें भी आतशे-जिगर,
मकाम तू ही मेरा छोड़ तुझे जाउँ किधर ।
तेरी सीरत में एजाज़ नज़र आता है,
या ख़ुदा क्या करुँ बह जाउं ना चली लहर ।
मन कहीं लगता नहीं तअन्नुद नामुमकिन है,
जरा इल्म की दौलत लेलूं मेरी बस्ती है उधर ।
इख्तियारी तुझपे करना मेरा अधिकार है,
तु मेरे ख्वाबों की मलिका मैं तेरा बसर ।
तुझको तेरे तसव्वुर में मैं आउँ बार बार,
मेरे पाँव जब कांटो में हो तुझको रहे ख़बर ।
दो बातें नज़रों से हो बचेगा दामन तेरा,
ढूंढना फिर गुलिस्तां में मर जाउंगा अगर ।
....Ali Musarrat Mirzapur