Ajay kumar suraj 30 Mar 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत #तुम्हारे चित्त मे छल बसा है #ajay-kumar-suraj #प्यार-मोहब्बत #ग़ज़ल #आलेख #राजनीतिक #सामाजिक #कविताएं #देश-प्रेम 100579 0 Hindi :: हिंदी
तुम्हारे चित्त मे छल बसा है ,मगर मुझे यकीं नही है |
हर सांस तेरी मेरी दिल की धड़कन,मगर तुम्हें यह पता नहीं है ||
तुम्हारे चित्त मे छल बसा है ,मगर मुझे यकीं नही है ---
हुई अजनबी तू क्यों मुझसे ,तुम्हारे लिए तड़प रहें हैं |
नैन तुम्हारे देख मुझको, शोला सा क्यों दहक रहे है ||
तुम्हारे चित्त मे छल बसा है ,मगर मुझे यकीं नही है ----
न कोई बाते अब है होती,न तुम थम कर इंतज़ार करती |
अजब सी लगन लगी है तुमसे,प्यार वफा का इजहार करती ||
तुम्हारे चित्त मे छल बसा है ,मगर मुझे यकीं नही है ----
खता हुई थी कौन हमसे,जो गैर की बाहों मे जा लिपटे |
तुम्हारी तड़प मे मेरी ज़िंदगी,मौत के सीने से जाके सिमटी ||
तुम्हारे चित्त मे छल बसा है ,मगर मुझे यकीं नही है --
भुला दिया खैरियत न पूछी,मेरे वफ़ा की चाह न सूझी|
तुम अपनी खुशियों मे डूबी,यहाँ मोहब्बत आँसुओ मे टपक रही है||
तुम्हारे चित्त मे छल बसा है ,मगर मुझे यकीं नही है ----
अजय कुमार सूरज