Ritvik Singh 30 Mar 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत #Google#Bing#Yahoo 31444 0 Hindi :: हिंदी
तुम मुझे इतना बता दो कि मेरे जेहन से जाने का क्या लगेगा
मैं सिमट जाऊँगा तुम में इस से ज़्यादा मेरा क्या लगेगा
तुम भी कर लेना मुझसे गुफ़्तुगू तंबिया हो जाऊँगा मैं
इन सब बातों में बताओ तुम्हारा क्या लगेगा
अब तुम्हारी दी हुई निशानी अगर मिटा भी दूँ तो
ज़्यादा से ज़्यादा एक हफ़्ता और इससे ज़्यादा क्या लगेगा
जिस दिन हिज्र की रात मनाऊँगा मैं यारो के साथ में
उस शराब-ए-वस्ल से ज़्यादा और उनका क्या लगेगा
तेरा दुःख दर्द दरियाँ बन के आँखों में आ जाता है
उस दरियाँ में डूबने का हमारा खर्च भला क्या लगेगा
जो दुश्मन हालत-ए-दिल के पास रहते है
जरा बताओ इस हिसाब से वो ऋत्विक हमारा क्या लगेगा
:- ऋत्विक सिंह ✍🏻