MUSARRAT ALI 18 Dec 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत Khamosh_Alfaz 11771 0 Hindi :: हिंदी
तन्हा तन्हा दिल बेकरार हो गया, तुझे सोचता रहा और प्यार हो गया । कभी-कभी तो मिलती थी निगाहें उनकी, पर ना जाने कैसे आखें चार हो गया । पलके शरमाती थी खुलने से पहले, जिनके इंतजार में मैं बीमार हो गया । आहें भर-भर के हमने भी उठाई नज़र, उनको मेरे नज़र पे इख़्तियार हो गया । ना कोई वादे हुए ना कोई मशवरा।, इस दिल-ए-नादान पे ऐतबार हो गया । ........ ALI MUSARRAT MIRZAPUR