Poonam Mishra 22 Jun 2023 ग़ज़ल समाजिक जीवन में इतना सन्नाटा क्यों है 25454 1 5 Hindi :: हिंदी
जीवन में इतना सन्नाटा पसरा क्यों है ? कई वर्ष पहले यह सन्नाटा मुझे दिखता क्यों न था ? सुबह उठते ही चिड़ियों की चहचहाहट से मेरी नींद खुलती थी। दोपहर होते ही पेड़ की छांव में बैठ गुल्ली डंडा कंचे लेकर घूमता हुआ बचपन मेरा कहीं गुम हो गया है ! आज न जाने क्यों ? सुबह से शाम हो जाती है मुझे पता ही नहीं चलता है! शाम के समय आकाश से अपने घर लौटते हुए पक्षी मुझे दीखते क्यों नहीं है ? अब वह वृक्ष कहां गए ? जो कभी बूढ़े बरगद के नाम से प्रसिद्ध थे । उस पेड़ के पास ही एक इमली का पेड़ भी था ,कुछ आम के वृक्ष भी थे , जिससे मैंने मीठे मीठे फल खाए थे , वह अब मुझे दीखते क्यों नहीं है? कहां चले गए वह सुनहरा जीवन मेरा ! शायद विकास की इस युग में सब अपने आप कहीं गुम हो गए हैं? मेरी ही तरह मुझे खोज रहे हैं स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा