Poonam Mishra 30 Mar 2023 ग़ज़ल समाजिक वह शहर वह गली वह मोहल्ला याद आता है 50280 0 Hindi :: हिंदी
मुझे आजकल न जाने क्यों ? वह शहर .वह मोहल्ला ,वह गली, याद आती है ! मैं .जब भी अपने घर के बालकनी में खड़ी होती हूं ! मुझे अपना वह छोटा सा शहर याद आता हैl अचानक! से मुझे हिचकियां, आने लगी, ऐसा लगता है ,वह घर भी मुझे याद करता है ! आज न जाने क्यों ?मन को यह अफसोस हो रहा है ,जब तक मैं उसमें थी l तब तक उसकी कीमत न समझी आज उस शहर से बिछड़ कर उस शहर, की उस घर ,की उस गली की उस मोहल्ले की बहुत याद आती है l आसमान छू लेने की चाहत में मैंने सब कुछ छोड़ कर ,बहुत आगे निकल आई हूं l अब वापस उस शहर में जाने के सारे रास्ते को बंद कर आई हूंl कभी-कभी मन विचलित !हो जाता है, तब मुझे अपने पुराने वह पल बहुत याद आते हैं स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा