Dipak Kumar 15 Jun 2023 ग़ज़ल दुःखद #google #hindi sahity #social 44679 0 Hindi :: हिंदी
ज़िन्दगी के फलसफ़े में अब न उलझाना मुझे
ख़ुद समझ लेना तो उसके बाद समझाना मुझे
मेरी दिन भर की उदासी को समझ लेता है वो
शाम होते ही बुला लेता है मयख़ाना मुझे
आईना भी अब मुझे कुछ अजनबी लगने लगा
अपने ही चेहरे से कहता हूँ कि पहचाना मुझे
आज फिर कुछ बस्तियाँ जलती नज़र आईं मुझे
आज फिर लिखना पड़ेगा एक अफ़साना मुझे
बदहवासी देखिये साक़ी ने यूँ बाँटी शराब
मेरा पैमाना उसे और उसका पैमाना मुझे
इन दिनों तो मुझको तिनके का सहारा भी नहीं
दोस्तो सैलाब की ज़द में न ले जाना मुझे
आज उसकी याद फिर चुपके से दिल में आ गई
आज कुछ आबाद-सा लगता है वीराना मुझे|
~ Dipak Kumar