Poonam Mishra 25 Apr 2023 ग़ज़ल समाजिक मेरे सपनों को तोड़ने में लगे हैं कुछ लोग 40844 0 Hindi :: हिंदी
मेरी आंखों ने भी कई सपने सजाए हैं । पर! क्या बताएं? यह सपने बड़ी मुश्किल से पूरे होते हैं। कुछ लोग लगे हैं मेरी उम्मीदों को तोड़ने में !पर उन्हें क्या पता !जब हौसले हो बुलंद तब राह की मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं। कब तक कोशिश करोगे तुम मुझे गिराने की , कल मैंने अपनी छत से देखा, आया एक बाज !कई घोंसला को तोड़ गया ! पर उसे क्या? पता अभी भी कई चिड़ियों के घर आबाद हुआ करते हैं । स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा