मोती लाल साहु 05 Apr 2025 ग़ज़ल अन्य मुसाफ़िर- #traveller of life- ग़ज़ल- #gazal- खोज- #explore- प्रेरणा- #motivation- आत्मज्ञान- #self knowledge- शायरी- #poetry- मोती- #Moti 17934 0 Hindi :: हिंदी
ये संसार-ए-ख्वाबों का शहर, क्यों फिरता ख़्वाबों में मुसाफ़िर। मन-ए-चंचल नाचाए मुसाफ़िर, ये ग़ज़ल तेरे नाम मुसाफ़िर।। रे आया खाली-ए-खाली जग, सब धन वैभव ख़्वाबों का खेल। ये महल अटारी झूठी आन, ये ग़ज़ल तेरे नाम मुसाफ़िर।। रे बना माटी है तन दो पल, बनेगा धूल-ए-धूल मुसाफ़िर। माया दिन-ए-रात करे तांडव, ये ग़ज़ल तेरे नाम मुसाफ़िर।। ये मन अहंकार में मुसाफ़िर, काम,क्रोध,मोह-ए-लोभ के बस। चोर बड़ा चित् चुराए मुसाफ़िर, ये ग़ज़ल तेरे नाम मुसाफ़िर।। ज़िंदगी आना-ए-जाना नाम, हर-ए-सांस में जीवन मुसाफ़िर। यह विधि है हर इंसा के नाम, ये ग़ज़ल तेरे नाम मुसाफ़िर।। -मोती