Poonam Mishra 30 Mar 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत क्या कहूं किसे कहूं कहा ही न जाए 108887 0 Hindi :: हिंदी
दिल चाहता है गुजरे पलों को याद किया ही न जाए पर न जाने क्यों उन पलों को याद किए बिना जिंदगी जिया ही न जाए शायद दुनिया की भीड़ भाड़ से अपने आप को एकांत में रख भी लिया जाए पर एकांत में उन पलों को भुला कैसे जाए यह उमड़ घुमड़ कर आते हुए बादल, काली घटाएं ,बरसती हुई बूंदे ,चारों तरफ फैली हुई हरियाली , है दिल को यह सब देख कर मन में एक हवा का झोंका बहुत ही तेजी के साथ गुजर कर निकल जाता है क्या कहूं ,किससे कहूं , कहने सुनने के लिए कोई पास तो हो इसी पल में कोई याद आता है उन पलों को भुला कैसे जाए पर दिल चाहता है गुजरे पलों को याद किया ही न जाए स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा