Naresh kumar 30 Nov 2025 ग़ज़ल अन्य खुदा, जमाना, हिमाकत, तैयार, मिटाना, हाथ, शर्त 11201 0 Hindi :: हिंदी
खुदा भी आयेगा न तुझको, बचाने के लिए
जरा सम्भल के आना , मुझको डुबाने के लिए
तू जानता है मैं तुझको नहीं, समझता कुछ
तू जो भी होगा और होगा,जमाने के लिए
तरस सा आ रहा है,तेरी हिमाकत को देखकर
कितना तैयार है तू, खुद को मिटाने के लिए
बात के साथ कलेजा,भी इसमें लगता है
हाथ काफी नहीं है ,शर्त लगाने के लिए
नरेश कुमार