Rambriksh Bahadurpuri 27 Nov 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत #रामवृक्ष बहादुरपुरी# अम्बेडकरनगर पोएट्री #गजल#कविता#गीत#कवि सम्मेलन #मुशायरा 11253 0 Hindi :: हिंदी
क्या पता कब,प्यार हो जाए
क्या पता कब,प्यार हो जाए 2
मन मेरा कब,तेरा हो जाए।
सुनता हूँ दुनिया दिवानी है
सबकी अपनी इक कहानी है,
कोई मीरा सा प्रेम में पागल,
डूब नजरों में उसके खो जाएं।
दिल में बसना तो आम होता है
मिलने पर तो सलाम होता है,
कैंद नजरों में तुझको कर लूं,
कब कोई ख्वाब हजार हो जाए।
कोई मिलता कोई बिछड़ता है
कोई गिरता कोई सभलता है,
चाह फिर भी रहे निगाहों की,
दीदार नजरों को मेरे हो जाए।
बहती सरिता का एक निर्झर हूँ
रूठे ऋतुओं की एक पतझड़ हूँ
चाह मधुवन की बनकर खुशबू,
खुमार सावन की मुझमें हो जाए।
पास बैठूं सदा पनाहों में
याद बनकर रहूं गुनाहों में
भूल पाऊं न भूलने से भी,
हो न हो मन सितार हो जाए।
रामवृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
9721244478
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...