Jyoti yadav 26 Oct 2024 ग़ज़ल अन्य तोडो ना बंधन जोड के 28093 0 Hindi :: हिंदी
तुझे हूं मै सासो मे बसाई तेरे नाम की राखी मंगाई हाय रे दिल तोड़ के कहां गए तुम राखी अपनी छोड़ के।। तुझे सुध ना मेरी आई ठुकराके रस्मे मेरी, कौन सी रस्म निभाई रूक तू यही बोल के कहां गए तुम राखी अपनी छोड़ के।।। किसका है बोझ तूम पे किसने है कर्ज डाला, हमसे जरूरी हुआ कौन, जो तूम फर्ज राखी का टाला, मै भी पगली समझू ना अब बात,तेरी भूल गए क्या तूम हमको रही फिकर ना मेरी तड़पताहै मन रखी हू धागा खोल के कहा गए तुमराखी अपनी छोड़ के,।।। अब ना समझाओ भाई, लौट के आओ भाई वादा किया है हम से अब फर्ज निभाओ भाई,। तोड़ो ना बंधन जोड़ के कहां गए तुम राखी अपनी छोड़ के।।।। विनय यादव ज्योति यादव के कलम से कोटिसा बिक्रमपुर सैदपुर गाजीपुर उत्तरप्रदेश