Arjun yadav dikoli 01 Dec 2025 ग़ज़ल समाजिक कविता/ लेखन/ आत्मकथा/जीवनी/कहानी/गजल 13411 0 Hindi :: हिंदी
हर पल नई राह दिखाती है ज़िंदगी, कभी ठोकर, कभी मंज़िल सिखाती है ज़िंदगी। हँसी के रंग से सजती है राहें हमारी, आँसू भी कभी सिखा जाते हैं सिखाती है ज़िंदगी। रातों की तन्हाई में जो खो जाता है, सुबह की रोशनी में वही मुस्कुराती है ज़िंदगी। हर मोड़ पर कुछ कहती है, सुनो ध्यान से, हर दर्द और हर खुशी गाती है ज़िंदगी।