Naresh kumar 30 Nov 2025 ग़ज़ल समाजिक चालाक, नादान, शैतान, बेईमान,भाव , दुकान 10214 0 Hindi :: हिंदी
है तो चालाक, मगर दिखता है नादान बहुत
या तो खुदा है वो,या फिर है ,शैतान बहुत
उसके दिल में है क्या,उसका तो खुदा ही जाने
पर वो लहज़े से तो, लगता है बेईमान बहुत
उसने दुनिया पे,सितम करने की मांगी है दुआ
इसलिए है खुदाई, उसपे मेहरबान बहुत
एक मगरूर के पैरों में,सर के बल गिरकर
हो गया काम निकलवाना, अब आसान बहुत
हर घड़ी सोचके, बैचैन में भी होता हूं
याद करके वो मुझे होगा, परेशान बहुत
टूट के बैठे हैं,सब भाव गिराने वाले
उसकी चलने लगी है ,और अब दुकान बहुत
नरेश कुमार