Jyoti yadav 19 Oct 2024 ग़ज़ल दुःखद कहा चले गए #घर मेरे आके#ज्योति यादव के कलम से#विनय #यादव# 37634 0 Hindi :: हिंदी
दिल के नगर में
शहर तू बसा के
कहां चले गए
घर मेरे आके❤️❤️❤️❤️❤️
हंस के हसा के
उम्मीदे तू जगा के
कहा चले गए
घर मेरे आके😭😭😭😭😭😭
दुनिया मे आके
जीना सिखा के
साथ साथ चलते
रहे तूम मुस्कुरा के
फिर यूं अचानक से हाथ छुड़ा के
कहा चले गए,घर मेरे आके😭😭😭😭
खुशियो का मंजर
दिखा के ,राखी बंधा के
गम मेरा हमसे चूरा के
धड़कन अपनी तू बना के
कहा चले गए घर मेरे आके😭😭😭😭😭😭
भूल ना जाना तूम
वचन जो दिया है वचन निभाना तूम
मै राखी मगंवा के रखी हूं
बधवाने आना तूम
जाना ना फिर कभी आके
दिल के नगर मे
शहर तू बसा के
कहा चले गए
घर मेरे आके❤️❤️❤️❤️❤️
(विनय यादव)
ज्योति यादव कलम से कोटिसा बिक्रमपुर सैदपुर गाजीपुर उत्तरप्रदेश