खींच खींच ले मन को जाते
मीत मनोहर वे बन जाते ,
उमड़- घुमड़ कर आगे पीछे
उड़ते बादल कहां को जाते |
कुछ नाचते खुशी मनाते
कुछ के आंसू झर झर जा read more >>
बहुत कुछ कहा
उस सिमटे लफ्ज़ ने,
जैसे सिलबट्टे आ गई हो सोच पर,
धीरे धीरे उम्र ढलती गई,
जाने कैसे फिर भी वही बात चलती हुई,
खामोश बातो को फि� read more >>