----: मोहब्बत का आशियाना :---------
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तुम बिन प्रीतम आती , मुझे कहीं नींद नहीं
रात को जागू दिन को जागू, जागू दिन और रात
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अक्सर इस दुनिया में,
दो अनजाने किसी न किसी,
मोड़ पर मिल जाते हैं ।
फिर ऐसा कुछ अजीब हो जाता है,
नींद खो जाती है_
चैन गायब हो जाती है।
फिर � read more >>
कुछ टूट गया, कुछ फूट गया।
माटी का ,खिलौना रूठ गया।।
तन लूट रहा, मन मौन रहा।
छाती से वजन, सा छूट गया।।
न राम मिला ,न श्याम मिला ।
न जाने मैं read more >>
( अपने बचपन का अधिकांश भाग मैंने यह सोच कर निकाला कि भगवान ने मुझे बिना कुछ दिए ही भेज दिया । विद्यालय में सुनता था "तुम्हारे पास दिमा� read more >>