हास्य-व्यंग्य आंदोलनजीवी
पड़ोसी ने मुझसे पूछा,‘‘भाईसाहब, अभी तक मैंने परजीवी शब्द सुन रखा था, जो दूसरे का खून चूसकर जिंदा रहता ह� read more >>
अनमोल जैसा नाम वैसा चरित्र
यही नाम था उसका अपने नाम अनुसार वह भी अनमोल था सिर्फ मेरे लिए नहीं सबके लिए।
यह बात तब की है जब मैं 12 साल का थ� read more >>
हां मैं कभी थकता नहीं मैं कभी रुकता नहीं, क्योंकि मैंने अपनी पत्नी से-- वादा किया है उसे हर खुशियां दूंगा,- हां मैंने वादा किया है_ कि उसे � read more >>
प्रथम अंक
हम उन दिनों की बात करता हु कि जब मै , नारण लाल , कालूराम, जितेद्र सिंह और अरविन्द जैन आदि एक छोटे से विद्यालय में पढ़ने जा रहे हो read more >>
उसका नाम विनोद था, सारी जिम्मेदारियां,
उसके कंधों पर था,
वह प्रतिदिन अपने पिता के लिए, शराब लाने के लिए, जाया करता था, उसी शराब के कारण, � read more >>
उसका नाम रतन था, लोग उसे काबुलीवाला, इसलिए कहते थे, कि उसके मासूम दिल में, सबके लिए प्रेम था, और उसने एक दिन_ अपनी जाने निछावर कर दी_ यह दर् read more >>
उस दिन को हम कभी भी नहीं भुला सकते_ वह एक सांड था, जो दिखने में बहुत ही खतरनाक था_ लेकिन उसके दिल में प्रेम था_ हमारे भावनाओं को समझता था_ य� read more >>
यह लगभग, 40 वर्ष पहले की बात है,
वह गांव का प्रधान था, उनकी हुकूमत से, हमारा गांव के लोग, कांपते थे
सारा गांव का जमीन, उन्हीं का नाम था, आस-पा read more >>
एक समय की बात है एक गांव में एक गरीब परिवार रहता था माता पिता दो भाई तीन बहन परिवार बहुत ही निर्धन था उस परिवार का कोई घर नहीं था एक छोटी � read more >>