Shubham Kumar 30 Mar 2023 कहानियाँ समाजिक जमीदारी शासन 66194 0 Hindi :: हिंदी
यह लगभग, 40 वर्ष पहले की बात है,
वह गांव का प्रधान था, उनकी हुकूमत से, हमारा गांव के लोग, कांपते थे
सारा गांव का जमीन, उन्हीं का नाम था, आस-पास के 5 गांव, के लोगों के ऊपर शासन करता था, वह जब भी किसी को
चाहता तो
उसे मरवा देता था_ वह गांव के मुखिया थे_ नाम बदला हुआ_ रंजीत सिंह__ उनके यहां प्रतिदिन_ उनके पास मजदूरी करने_
जानवरों को_ घास देने_ यह सारा दिन खेत जोतने, का कार्य, प्रत्येक घर से, 1 लोग को जाना होता था, जिस दिन अगर_ लोग नहीं जाते थे_ किसी भी कारणवश, अगर कोई नहीं पहुंचा था, उनकी जमकर पिटाई होती थी_
सारा दिन काम करने पर, उन्हें मजदूरी के तौर पर, 5 किलो चावल दिया जाता था,
उनको नाश्ते में, कुछ सुखी रूखी रोटियां मिल जाती थी_ वह लोग खुद को छत्रिय _
कहते थे, बाकी सब जातियां, के हाथों से पानी पीना गुनाह समझते थे,
गांव का प्रधान_ जब गांव में दाखिल होता था_ तो कोई भी आदमी_ चारपाई पर, बैठा रहता है, तो उनकी_ अच्छी खासी पिटाई हो जाती थी, गांव वाले का क्या मजाल_ उनके सामने खड़ा रहने की_
हिम्मत भी जुटा सके_ सारागांव, उनकी बातों को_ हुकुम मानते थे_ आसपास के सारे जमीनी_ सब उसी के नाम था_ जो जमीन उनकी नहीं रहती_ तो वह उसे_ दो से
4 किलो अनाज देकर खरीद लेते ,
आज भी कितने लोग जो छोटी जाति के हैं, उनकी जमीनें, गांव के जमीदारों, के पास है, जो तानाशाह ,,,,,,,,
भी होते थे,, वह लोग गरीबी भुखमरी_ बेरोजगारी के कारण_ जमीनों को कुछ अनाज और पैसे_ वह बिक्री कर चुके थे_
जिनके कारण भेदभाव के कारण, कोई रोजगार,भी नहीं देता था, अगर रोजगार
दीया भी जाता था तो, गुलामी मजदूरी के अलावा_ कार्य नहीं था, मजदूरी बहुत कम होती थीll
लोगों का पेट चलाना मुश्किल होता था,,,
शिक्षा तो दूर की बात, यह गांव में मुख्य कारण है गरीबी का_ जमीदारी प्रथा_ के कारण_ गांव का भविष्य, अंधकार में,, चला गया,, गांव के लोग,
बहुत भोले भाले हैं, वह मालिक को सम्मान देना जानते हैं,
अगर कोई लोग इसका फायदा उठाते हैं,
हमारे समाज के लिए, यह बहुत ही रोने वाली बात है,
Mujhe likhna Achcha lagta hai, Har Sahitya live per Ham Kuchh Rachna, prakashit kar rahe hain, pah...