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"पीपल वाली भूतनी" चाय की दुकान पर 4,5 दोस्त खड़े आपस में बात कर रहे हैं राम, श्याम,बंटी,पिंटू,गोलू राम - अरे यार कल मैं दोपहर में उस जंगल वा� read more >>
साहिल और आर्यन बचपन से ही सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों एक ही स्कूल में पढ़े, एक साथ खेलते, हँसते और अपने हर सपने एक-दूसरे से साझा करते थे। read more >>
रात का समय था। वीरानपुर गाँव की हवाओं में एक अजीब-सी खामोशी घुली हुई थी। दूर पहाड़ी पर खड़ा पुराना ठाकुर हवेली का खंडहर चाँदनी में किस� read more >>
आयान हमेशा सोचता था कि उसके पापा उससे ज़्यादा सख़्त हैं। सुबह जल्दी उठाना… समय पर पढ़ाई करना… दोस्तों के साथ देर तक बाहर ना रहने देन� read more >>
यूसुफ और अलीज़ा अक्सर अपने कमरे में बैठकर बातें करते थे। “काश हम मम्मी-पापा के समय में पैदा होते…” अलीज़ा ने मोबाइल स्क्रीन देखते हु read more >>
That winter morning was colder than usual. Sahil quietly tied the laces of his old blue shoes. The sides were slightly torn, and the color had faded, but they were the only shoes he had. His mother had stitched them twice already. “Take care of them,” she would always say gently. “We’ll buy new ones when we can.” On his way to sc read more >>
उस रात अस्पताल की दीवारें भी जैसे चुप थीं। हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। बारह साल का अयान अपनी माँ का हाथ पकड़े ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठ� read more >>
आरव एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का था। उसकी दोस्ती एक अमीर परिवार के लड़के, समर, से थी। वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानता था कि उसे राह दि read more >>
प्रस्ताविका काही प्रेमकथा संपतातकारण प्रेम कमी पडतं म्हणून नाही, तर समाज मोठा पडतो म्हणून. ही गोष्ट आहे खिडकीआड फुललेल्या प्रेमाच� read more >>
सोमवार की सुबह थी। स्कूल की घंटी रोज़ की तरह बजी, लेकिन आज विकल्प के भीतर कुछ अलग ही बज रहा था। आज वह किसी सवाल से नहीं, एक निर्णय से स� read more >>
आज की सुबह दिनेश के लिए नासूर बनकर उगी थी। वह अब भी अपने बिस्तर पर लेटा था। आँखें खुली थीं, पर उनमें उठने का कोई इरादा नहीं था— मानो रात � read more >>
ख्वाब के पार : हक़ीक़त (भाग – 3) आज रविवार का दिन था, फिर भी आदि आज जल्दी उठ गया। उसे स्कूल नहीं जाना था, लेकिन वह रोज़ की तरह तैयार हुआ� read more >>
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