गीत- आ कहीं ओर चलें।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चले।
कोई वापस ना बुला ले, आ कही ओर चले।
चांद तारों से परे भी, त� read more >>
तर्ज=>
शीशे का था दिल मेरा हाय,पत्थर का जमाना था दिल टूट गया
जिनका हाथ में हाथ था हाय,मुझे कुछ सिखाना था साथ टूट गया!
(नाम) तुमने भला ह� read more >>
तर्ज़=>सरकी सर जो धीरे धीरे,मे पागल हुआ रे में धीरे धीरे
टेक=>ला ला ला ला
निकली जो घर से धीरे धीरे,छुप गया रे वो तो धीरे धीरे
ये गुजरिआ... � read more >>