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आ कहीं ओर चलें।

Jitendra Sharma 30 Mar 2023 गीत प्यार-महोब्बत Jitendra Sharma, aa kahin aur chale, आ कहीं ओर चलें। जितेन्द्र शर्मा, गीत, गजल , कविता 50578 1 5 Hindi :: हिंदी

गीत- आ कहीं ओर चलें।
रचना- जितेन्द्र शर्मा

कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चले।
कोई वापस ना बुला ले, आ कही ओर चले।
चांद तारों से परे भी, तो जहाँ और कई हैं।
हमको आगोश में भर लें, वो जहां ओर कई हैं।
कोई उनको ना छुपा ले, आ कहीं ओर चलें।
कोई तुझको ना चुराले, आ कहीं ओर चलें।

गुनगुनाने पर हो पहरा, हम वहां कैसे रहें।
खिलखिलाना भी हो  मुस्किल, ये बता कैसे सहें।
हम भी तो मुस्कुरा ले, आ कहीं ओर चले।
कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चलें।

वहाँ चले हम, फूलों ने सजाया हो जहां।
वहां चलें हम, अपनों से मुस्कराया हो जहां।।

अपने को अपनो से मिला लें, आ कहीं ओर चलें।
कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चलें।

Comments & Reviews

Jitendra Sharma
Jitendra Sharma अति सुन्दर।

3 years ago

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