बहर:_2122,2122,2122,212
क़ाफिया:_पीर
रदीफ:_को
मिसरा:_क्या सुधा भी हर सकेगी आज मेरी पीर को
मैं चला हूं अब, सजाने फूल से तसवीर को।
टाल लूंगा श्रम, कड़ा read more >>
तर्ज़=>
बंसी बजी हो मधुवन मे,जो जिया नैया मोरे बस मे
लल्ला जन्म लये हो आँगन मे,देखे बिना जी नैया बस में
बस मे हतो री,अब नैया मोरे बस मे� read more >>
हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग।
मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग।
जीत सुनिश्चित कर चलें,रखें सत्य का ज्ञान_
खुशियों से जीवन चले, द� read more >>
बहर:_2122,2122,2122,212
मैं चला हूं अब, सजाने फूल से तसवीर को।
बदल लूंगा श्रम, कड़ा कर नीच सी तक़दीर को।
तुम नगीना हो, खजाने की सजा दी हो मुझे_
खत्म � read more >>
किसी ने किसी के सपनों, का इन्तकाल ही कर दिया है,
बेरहम मासूम जज़्बे, को कुचल कर राख कर दिया है,
क्या मजाल कि जनाब एक, भी अल्फाज़ से आगे आते_ read more >>
सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम।
सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम।
गम को हम तूं मार दें,हरदम रखें जुगार_
जन्म मरण से मुक्त कर,द� read more >>