माता तेरे मंदिर में
में, हार के बैठा हूं
भवानी कुछ कह दे .......
लगी बाजी जीवन की
में मझधार में बैठा हुं ......
हो....
अंबे रानी कुछ ही कह दे.....
दे� read more >>
वहा चांद छुपा आईने में
रचनाये -प्रतिभा खडेकार
हे हे हे ला ला ला ला ला,,हे हे हे ला ला ला ला ला...
वहा चांद छुपा आईने में,, देखते मुस्कुरा त read more >>
तुझे भूल गई रे ......
यारा, मैं तो दीवानी
सोच के बैठी हूं।
तुझे भूल गए रे....
यारा ,मेरे मैं तो दीवानी
सोच के बैठे हूं ।
बाहें, तेरी बन गई थी मे read more >>
अपने पराये क्यों, लगने लगे हैं
रिश्तों से अब हम, बिछड़ने लगे हैं .
कल तलक जो साया बनकर ,साथ-साथ चलते
आज है ख़फ़ा जैसे ,अंजान हो कोई हम.
अ� read more >>
न जाने क्यों ....२२
नाराज सी रहती है।
आजकल है।..........
तू....?..........
बदल गए हैं हाव-भाव तेरे
दूर खड़ा मैं देखता हूं ।। यही
न जाने.............
तुझे जग वा� read more >>
कहने लगी है ।
बहती हवाऐं
ये किस्सें उन दीवानों के जो पहरी है ।सरहदों पे .........
देखो
कहने लगी है..........
उन्हें सलाम करने का दिल करता है ।।
वत� read more >>