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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह
संदीप कुमार सिंह
@ sandeep-kumar-singh
, Bihar
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.
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आया सावन झूम कर
आया सावन झूम के, निर्मल हो बरसात। कोयल गाती गीत है, मधुर मिलन की रात।। आया सावन झूम के, बादल गरजे घोर। पवन मस्त है रूप में, नई लगी है भोर�
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मुक्तक _छंद
देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, रूत गज़ब मस्तानी चारों ओर छा गई, बिजली चमके विद्युत सी सभी को चौकाएं, प्रेम भक्ति के धार धरा पर है फैल गई। हल�
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सावन में प्रीत
सावन का महीना आया, श्याम बदरा बरसे चारों ओर। झूले पड़ गए वृंदा वन में, झूले राधे संग नन्द किशोर। देख बृजवासी अति हर्षाए, दोनों हैं रू
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सावन में प्रीत
सावन का महीना आया, श्याम बदरा बरसे चारों ओर। झूले पड़ गए वृंदा वन में, झूले राधे संग नन्द किशोर। देख बृजवासी अति हर्षाए, दोनों हैं रू
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दुनिया दासी अर्थ की
दुनिया दासी अर्थ की, इसमें में है शक्ति। आज मुख्य है बात ये, करते सारे भक्ति।। दुनिया दासी अर्थ की, पूरा करते शौख। इसको रखिए अब बचा, बन
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शिक्षा का सम्मान
शिक्षा का सम्मान कर, देंगें दृढ़ परिणाम। करें देश को सबल सब, होत जगत में नाम।। शिक्षा का सम्मान से, मानव करे विकास। खुशियों में जीवन क�
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बेटी
बेटी दिवस बनी खुशी, घर_घर दिखे उमंग। बेटी अपनी ताज है, निर्मल पुनीत गंग।। सुता बचाना जन सभी, करना कभी न नाश। बेटी सबकी मूल है,छुआ सके आक
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कुंडलिया
सुरभित रहते आप हो, सपने हो मंसूब। प्रेम प्रीत मानव रखें, कटे जिन्दगी खूब।। कटे जिन्दगी खूब, सजे जीवन तब सारा। मिसाल बनते आप, प्रेम हयात
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मां _बेटी
मां बेटी से जग सजे, ममता की ये खान। खिले परिवार फूल सी,सुन्दर अनुपम शान।। मां मूरत हैं त्याग की, रखती असीम प्यार। बेटी घर की नूर है, सरस
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यादें
यादें आती रात, साथ रहते थे साथी। करते मनभर बात, ग्राम में आते हाथी।। यादें मन की चैन, रैन जैसी है सूरत। दिल में उलझन आज,दिव्य दिखती वह म�
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