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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
@ sandeep-kumar-singh
, Bihar
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.
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कल्पना की दुनिया
कल्पना की दुनिया को साकार करना है, अपने सपने को हर हाल में सच करना है। देखूं स्वपन रजनी की आगोश में, प्रातः उठते ठगा सा रह जाता हूं। प�
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मनुज जन्म
मनुज कर्म करते चलें, जीवन में हो काम। जैसी करनी आपका, वैसा हो परिणाम।। मनुज जन्म सार्थक करें,होगा जग में नाम। बनें नेत्र तब समाज के,सद�
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जो विधि लिखा लिलार
जो विधि लिखा लिलार है,समझ इसे तूं ईश। कर्म राह चलता रहूं, कृपा करे जगदीश।। जो विधि लिखा लिलार है,होना नहीं हताश। नेक इरादे रख सदा,खुशि�
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हमराही
हमराही से प्यार है,करता सदा दुलार। जीवन भर का साथ है,खुशियां हो बौछार।। खुशियां हो बौछार जब, स्वस्थ रहे तब गात। जीने का तब है मज़ा,सुर�
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जीवन भर का साथ है
हमराही से प्यार है,करता सदा दुलार। जीवन भर का साथ है,खुशियां हो बौछार। खुशियां हो बौछार जब, स्वस्थ रहे तब गात_ जीने का तब है मज़ा,सुरभि�
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हरि_प्रेम
प्यारे तारे हरि लगे, लगते तुम हो चांद। दिव्य सितारे आप ही,होते कभी न मांद।। सदा सहारे आप प्रभु,अभिलाषा भी आप। मंजिल भी हो आप ही, करूं आ�
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वृंदावन सुखधाम है
वृंदावन सुखधाम है, जहां अटल अभिराम। राधा रमण निवास से, कण कण है गुलफाम।। वृंदावन सुखधाम है,सुन्दर मृदुल स्वभाव। प्रेम धार में मग्न स�
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मन वीणा के तार है
मन वीणा के तार है, रखूं मध्य में साज। गीत प्रेम का मैं सुनूं,कायम रहता राज।। मन वीणा के तार सा, उड़े फिरे यह तेज। रखता हूं सम्हाल कर,खुश�
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प्यार से पेश आया करो
प्यार से पेश आया करो, दिल सदा ही लगाया करो। प्रेम की जोत को साथ रख, दीप को तुम जलाया करो। खास बन तुम जहां में सदा, तिमिर को तुम भगाया कर
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तालमेल ज़रूरी
हां प्यार में कभी खिचखिच तो कभी किशमिश है, होता है क्योंकि मन है समान तो रहता ही नहीं, आज के आधुनिक युग में भागम भाग है, ध्यान और ख्याल इ�
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