संदीप कुमार सिंह 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता काफी रोमांचक है पाठक गण अवश्य ही लाभान्वित होंगें। 29980 0 Hindi :: हिंदी
देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, रूत गज़ब मस्तानी चारों ओर छा गई, बिजली चमके विद्युत सी सभी को चौकाएं, प्रेम भक्ति के धार धरा पर है फैल गई। हलरियाली ही हरियाली आ गई, देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, सावन मास की आई है मौसम बहार, प्रित ही प्रीत सबके दिलों में बस गई। धरती रंगीन परिधानों में है सज गई, देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, सावन की घटा मन को है लुभाती, रौनक ही रौनक व्याप्त अब हो गई। सावन सुहाना मस्ती के झोंका लाई, देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, बागों में चलें झूला झूलन को सखी, राधे_श्याम दिलों में प्रेम से बस गई। पुरवाई बयार मस्ती का है आलम लाई, देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, प्रेम की कसक मन को खूब तरसाये, भागी_भागी पिया मिलन को मैं आ गई। देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, सावन की घटा अम्बर पे छा गई, धरा की प्यास और अब बढ़ चली है, बरसात यह रौनक लेकर आ गई। घन घोर गर्जन की आवाज आ गई, देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, बिजली भी रात में चमक रही है, आस पूरे करने की रात सज गई। देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, फलक ने आज खूब वर्षा बसराई, मस्ती में मग्न हम सब खूब झूमे गाए, अरमानों ने आज फिर है पंख लगाई। सावन का पवित्र मास है आई, देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, भोले के द्वारे खूब भीड़ उमड़ पड़ी है, भक्तों और भक्ति की रैन खिल गई। देखो री सखी पावस ऋतु आ गई, राधा_श्याम के संग झूला झूलने आ गई, वृंद वासी की भीड़ वृंदावन में उमड़ आए, देख दोनो को मन में प्यार की फूल खिल गई। संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....