मैं एक इन्सान -
निर्धन की संसार ;
शिति - दीन हूँ ,
मुझे कहीं जगह ना मिला -
इसलिए उत्पीड़न की गर्भ में लिया स्थान ;
मैं आधि - व्याधि की गर्भ से � read more >>
नत नयन मेरी दृष्टि -
दो नयन में ! दो बूँद अत्रु लेकर ;
घर की चूल्हा देखकर ,
ऐ कैसी तेरी सृष्टि -
रे भगवान , हे अल्लाह ,
ठंड पड़ चुकी थी चूल्हा ;
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लड़का :-
एक दो मुलाकातों में
बातों - बातों में
हे सनम ! हमें तुम से प्यार हो गया
मिला के नज़र
घायल करके जिगर
अब तो गुमशुदा दिल का खुमार हो � read more >>
सायंकाल का प्रहर -
जिसे देती विदाई कोई ;
सुरबाला सी नारी -
पहन के सफेद साड़ी ,
विदाई दे रही है -
सज - धज कर ;
लेता विदाई दिनकर -
नींद की तैयारी read more >>
ओ मेरे महबूब - ओ मेरे महबूब
तू याद आने लगी है खूब
ये घर ये संसार सूना -सूना
क्या आप ने दिल की आवाज सुना
आप से घर का हर कोना -कोना
चमके बनके � read more >>
अबोध बालपन -
कितना नादान -
बड़ा होकर बनू किसान ;
यहीं सोचता रहा -
एकाग्रता से पिता का श्रम देखता रहा -
मेरा नादान बालपन सपना सजाता रहा -
बा� read more >>