युग- युग ने यह गीत गाया, अत्याचारी कभी बच नहीं पाया ।
जिस ने किया अत्याचार उसको पड़ी समय की मार ,समय कभी राम बनके आए ,ना माने अत्याचारी पु read more >>
मेरे मन में एक सवाल आया कैसे मन ने इंसान को गुलाम बनाया ।
मन वश में कर न सके, अपनों के साथ रह ना सके।
खून ही हो गया खून का प्यासा अब किसी औ� read more >>